भूमि डायवर्सन में रिश्वत के आरोप, सहसपुर लोहारा SDM कार्यालय के लिपिक पर गंभीर शिकायत

75 हजार के चालान और 30 हजार की मांग का दावा, 15 हजार देने के बाद भी 116 दिन से प्रकरण लंबित रखने का आरोप
कवर्धा। सहसपुर लोहारा के अनुविभागीय अधिकारी राजस्व (SDM) कार्यालय में भूमि डायवर्सन के एक प्रकरण को लेकर गंभीर आरोप सामने आए हैं। ग्राम दरीगवा निवासी संतोष जायसवाल ने 17 सितंबर 2026 को जिला कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी को लिखित शिकायत देकर एसडीएम कार्यालय में पदस्थ लिपिक आशुतोष श्रीवास्तव पर भूमि डायवर्सन प्रकरण में अतिरिक्त राशि की मांग करने, काम लंबित रखने और आवेदक को परेशान करने के आरोप लगाए हैं। शिकायतकर्ता ने पूरे मामले की जांच कराने और लंबित डायवर्सन प्रकरण में कार्रवाई की मांग की है।
13 मई को किया था ऑनलाइन आवेदन
शिकायतकर्ता संतोष जायसवाल के अनुसार उन्होंने अपनी माता उदासा बाई पति जकलू राम के नाम दर्ज खसरा नंबर 656/6, रकबा 0.0240 हेक्टेयर भूमि के आवासीय प्रयोजन के लिए 13 मई 2026 को ऑनलाइन भूमि डायवर्सन आवेदन किया था। शिकायत में कहा गया है कि ई-चालान का भुगतान कर आवश्यक दस्तावेज ऑनलाइन अपलोड किए गए थे।

शिकायतकर्ता का दावा है कि उन्होंने एसडीएम कार्यालय में व्यक्तिगत रूप से दस्तावेज दिखाकर उनकी जांच भी कराई थी। ग्राम एवं नगर निवेश विभाग की विकास अनुज्ञा भी आवेदन के साथ संलग्न होने की बात शिकायत में कही गई है।
75 हजार के चालान का दावा, फिर 30 हजार मांगने का आरोप
शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि एसडीएम कार्यालय में पदस्थ लिपिक आशुतोष श्रीवास्तव ने खाली भूमि के संबंध में करीब 75 हजार रुपए का चालान आने की बात कही थी। वहीं शिकायतकर्ता के अनुसार संबंधित राजस्व निरीक्षक ने किसी अन्य अतिरिक्त चालान की आवश्यकता नहीं होने की जानकारी दी थी।
शिकायत में दावा किया गया है कि एसडीएम से मुलाकात करने पर भी किसी अतिरिक्त चालान की बात नहीं कही गई। इसके बाद शिकायतकर्ता से कथित रूप से 30 हजार रुपए की मांग की गई।
15 हजार रुपए देने का दावा, फिर भी नहीं हुआ काम
संतोष जायसवाल ने अपनी शिकायत में दावा किया है कि आवेदन के करीब 15 दिन बाद उन्होंने लिपिक आशुतोष श्रीवास्तव को 15 हजार रुपए नकद दिए थे। आरोप यह भी है कि लिपिक लोहारा स्थित कंप्यूटर दुकान के माध्यम से नगद एवं ऑनलाइन रिश्वत लेते हैं। शिकायतकर्ता का आरोप है कि रकम देने के बाद भी उनसे और राशि की मांग की गई और उनका प्रकरण आगे नहीं बढ़ाया गया।
शिकायत दिनांक 17 सितंबर के अनुसार आवेदन किए 116 दिन बीतने के बाद भी आदेश जारी नहीं हुआ। शिकायतकर्ता ने इसे निर्धारित समय में काम नहीं होने और अनावश्यक रूप से प्रकरण लंबित रखने का मामला बताया है।
‘बिना मोटी रकम के आदेश नहीं होता’ का आरोप
शिकायत में संतोष जायसवाल ने आरोप लगाया है कि सहसपुर लोहारा अनुविभागीय कार्यालय में आने वाले भूमि डायवर्सन के प्रकरणों में बिना कथित लेन-देन के आदेश नहीं किए जाते। उन्होंने कलेक्टर से मांग की है कि कार्यालय में प्राप्त सभी डायवर्सन आवेदनों की ऑनलाइन स्थिति और उनके निराकरण की जांच कराई जाए।
शिकायतकर्ता का दावा है कि जांच से यह स्पष्ट हो सकता है कि कितने प्रकरणों में समय पर आदेश हुए और कितने प्रकरण लंबित हैं।
ऑनलाइन प्रक्रिया पर भी उठाए सवाल
मामले में ऑनलाइन डायवर्सन प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। शिकायतकर्ता का कहना है कि यदि आवेदन ऑनलाइन है और दस्तावेज भी ऑनलाइन जमा होते हैं, तो फिर प्रकरण के निराकरण में आवेदक को कार्यालय के चक्कर क्यों लगाने पड़ रहे हैं।
शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि प्रकरण निरस्त होने या कलेक्टर के पास अपील करने का डर दिखाकर आवेदकों पर दबाव बनाया जाता है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
कलेक्टर से जांच और ग्रामीणों को राहत की मांग
संतोष जायसवाल ने कलेक्टर से मामले की जांच कराने के साथ लंबित डायवर्सन प्रकरण को आगे बढ़ाने और ग्रामीण आवेदकों को अनावश्यक परेशानी से बचाने की मांग की है।
शिकायत की प्रतिलिपि मुख्यमंत्री छत्तीसगढ़ शासन, राजस्व मंत्री कार्यालय तथा कवर्धा और पंडरिया विधानसभा के विधायकों को भी भेजे जाने का उल्लेख किया गया है।
अब मामले में जिला प्रशासन की जांच और सहसपुर लोहारा एसडीएम कार्यालय की ओर से सामने आने वाले पक्ष पर नजर रहेगी। शिकायत में लगाए गए रिश्वतखोरी, राशि की मांग और प्रकरण लंबित रखने के आरोपों की वास्तविकता जांच के बाद ही स्पष्ट होगी। वहीं संबंधित लिपिक और एसडीएम कार्यालय का पक्ष सामने आने पर उसे भी खबर में शामिल किया जाएगा।





